भारतीय सिने जगत में अप्रतिम सौंदर्य और सशक्त अभिनय के लिए पहचानी जाने वाली अभिनेत्री मधुबाला की जीवनी का लोकार्पण किया गया।
‘मधुबाला..दर्द का सफर’जीवनी का लोकार्पण फिल्म डिवीजन स्थित सभागार में आयोजित किया गया।
इस मौके पर सांसद राशिद अल्वी ने कहा कि राजनेताओं की प्रसिद्धी का दौर काफी छोटा होता है, लेकिन कलाकारों एवं कलमकारों की लोकप्रियता कालखंड से परे होती है।
उन्होंने कहा कि मधुबाला जैसे कलाकार को भले ही उनके जीवन में उचित सम्मान न दिया गया हो, लेकिन वह सदियों तक लोगों के दिलों पर राज करती रहेंगी।
इस मौके पर पुस्तक की लेखिका सुशीला कुमारी ने कहा कि मधुबाला अपनी जिंदगी में खुशियों और प्यार से कोसों दूर रही। उन्हें दुख, तन्हाई और तिरस्कार के सिवा कुछ नहीं मिला। उनका हंसता हुआ चेहरा देखकर शायद ही आभास हो कि इसके पीछे कितना भयानक दर्द छिपा था।
गौरतलब है कि मुगल-ए-आजम,महल, हाफ टिकट, फागुन, चलती का नाम गाड़ी और हावड़ा ब्रिज जैसी फिल्मों में अभिनय और सौंदर्य का जलवा बिखेरने वाली मधुबाला का मात्र 36 साल की उम्र में निधन हो गया था।
यह समाचार समय टीवी की वेबसाइट पर प्रसारित हो चुका है। मूल पोस्ट देखने के लिये यहां क्लिक करें।
Sunday, January 17, 2010
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